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Shivalay Palaceमहेश्वर · नर्मदा किनारे

इतिहास और संस्कृति

देवी अहिल्याबाई होल्कर: महेश्वर को गढ़ने वाली रानी

न्याय, धर्मपरायणता और जनकल्याण के कार्यों के लिए याद की जाने वाली शासक — और महेश्वर के आज के रूप की वजह।

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देवी अहिल्याबाई होल्कर (1725–1795) ने 1767 से 1795 तक मालवा के होल्कर राज्य पर शासन किया, और महेश्वर उनकी राजधानी थी। उन्हें न्यायपूर्ण शासन और पूरे भारत में मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं के निर्माण व जीर्णोद्धार के लिए याद किया जाता है। उनकी जयंती, अहिल्याबाई जयंती, 31 मई को है।

संक्षेप में उनका जीवन

वर्षघटना
172531 मई को आज के महाराष्ट्र के चौंडी में जन्म
1754पति खंडेराव होल्कर युद्ध में वीरगति को प्राप्त
1766–67ससुर मल्हारराव होल्कर और फिर पुत्र का निधन
1767राज्य की बागडोर संभाली और राजधानी महेश्वर लाईं
1795महेश्वर में निधन

न्याय के लिए याद की जाने वाली शासक

अहिल्याबाई राजवाड़ा में खुला दरबार लगाती थीं और फ़रियादें ख़ुद सुनती थीं। उस समय के विवरण एक स्थिर, समृद्ध राज्य बताते हैं जहाँ कर न्यायपूर्ण थे और रास्ते सुरक्षित।

पूरे भारत में निर्माण

उन्होंने पूरे भारत के तीर्थस्थलों पर मंदिर, घाट, कुएँ और धर्मशालाएँ बनवाईं — जिनमें वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर और सोमनाथ, गया व कई अन्य स्थानों पर कार्य शामिल हैं। महेश्वर में उन्होंने वे घाट, मंदिर और छतरियाँ बनवाईं जो आज भी नदी किनारे खड़े हैं।

बुनाई की विरासत

18वीं सदी में महेश्वर में बुनकरों को बसाने का श्रेय अहिल्याबाई को दिया जाता है। दोनों ओर से एक-सी किनारी वाली महेश्वरी साड़ी इसी परंपरा से निकली और 2012 में उसे GI टैग मिला। हमारी साड़ी गाइड देखें।

महेश्वर में अहिल्याबाई जयंती

31 मई को शहर उनकी जयंती शोभायात्रा, राजवाड़ा में पूजा और घाटों पर कार्यक्रमों के साथ मनाता है।

स्रोत

मध्य प्रदेश पर्यटन, खरगोन ज़िले की वेबसाइट और Incredible India।

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सवाल-जवाब

अहिल्याबाई होल्कर कौन थीं?

1767 से 1795 तक मालवा के होल्कर राज्य की शासक, जिनकी राजधानी महेश्वर थी।

अहिल्याबाई जयंती कब है?

31 मई।

महेश्वर में अहिल्याबाई कहाँ रहती थीं?

अहिल्या किले के अंदर राजवाड़ा में।

उन्होंने क्या बनवाया?

पूरे भारत में मंदिर, घाट, कुएँ और धर्मशालाएँ, जिनमें वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर भी है।

क्या राजवाड़ा देखा जा सकता है?

हाँ, सुबह 7 से शाम 6 बजे तक।